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अंतर्मना मुनि श्री प्रसन्नसागरजी महाराज
उत्तुंग व्यक्तित्व के धनी मुनि प्रसन्न सागरजी, आचार्य पुष्पदंत सागरजी के उपवन के एक महकते पुष्प हैं। जैन धर्म की दिगम्बर आमना के गहन मुमुक्षी अपने आदि और अंत की तलाश में उस उम्र में निकल पडे थे जब उनके संगी साथी भौतिक विश्व में खोये हुए थे। 23 जुलाई 1970 के दिन बुन्देलखण्ड के छतरपुर में अभय कुमार और शोभादेवी के घर जन्मे इस बालक ने अपने परिवार को 18 अप्रेल 1989 के दिन दिगम्बरी दीक्षा लेकर गौरवान्वित कर दिया। अभी पिछली महावीर जयन्ती के दिन 108 मुनि प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपनी तपस्या के 25 वर्ष पूरे किये।
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चित्रवीथि
 
आज का संदेश
संकट के समय जिसने दो बूंद पानी दिया हो, उसके एहसान को कभी नहीं भूलना।
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